वर्षा एक प्राकृतिक तोहफा , बरसा की जरुरत एवं महत्व ।

हम बारिश के बारे में बात कर रहे हैं तो पहले आप यह  जान लीजिए कि बारिश प्राकृतिक नवीकरणीय प्रक्रिया है । बारिस को चक्रिय ( recycle )भी कहते है । क्योंकि जो बारिश धरती पर होती है वहीं पानी फिर वाष्प बनकर आकाश में जाता है , और बरसता है । इसलिए इसे चक्रिय प्रक्रिया भी कहते हैं ।



अब बात करते हैं बारिश कैसे होती हैं? हमारे धरती को आकाश से देखने पर हमारा धरती नीली और हरि रंग की दिखती है । इसका कारण हमारे धरती पर मौजूद पानी । हमारे धरती पर 71%  भू-भाग पर जल ही जल है । जिसका 96.5 % मात्रा समुंद्र की जल है । बाकी हमारी दैनिक उपयोग का पानी है । जिसका स्रोत चापाकल , कुआँ , बहता नदी और साफ पोखर है   लेकिन इस ज़माने में हम सिर्फ चापाकल पानी और बोर्डिग पानी का ही प्रयोग कर पाते हैं । क्योंकि आज के समय में नदी , पोखर , कुआँ का पानी दूषित हो चुका है


एक हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि वैज्ञानिको के अनुसार हमारे शरीर के हिस्से में पानी के 65% मात्रा उपलब्ध हैं ।

एक बहुत ही चौकाने वाली बात जो शायद आपको मालूम भी नहीं हो की हमारे धरती पर कभी-कभी बारिश के साथ मछली की बारिश , कछुआ की बारिश और अन्य जलीय जीव की बारिश कैसे होती है । इसका कारण यही है की जब हमारे समुंद्र में चक्रवात या बवंडर आता है तो । समुंद्र की उछाल  के साथ-साथ बहुत सारे जलीय जीव आकास में दूर-दूर तक चले जाते हैं । वही जीव बादल के सहारे एक जगह से दूसरे जगह पर जाती है और बारिश के साथ बरसने लगती हैं ।



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