बारिश का मतलब और बारिश के पहली बूंदे ।





बारिश की बात करें तो पहले यह जान ले की । यह एक प्राकृतिक नवीकरनीय चक्रिय प्रक्रिया है । मतलब कि यह प्राकृतिक विघ्टनो द्वारा होती है । और हमेशा नया बारिश होती है । और चक्रीय भी मतलब कि जो पानी धरती पर होता है वही आकाश में जाकर बादल का रुप ले कर धरती पर बरसती है । और यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक समय वातावरण हवा ठंडा गर्म के अनुसार होती है ।

कभी-कभी धरती पर अधिक गर्मी पड़ने के कारण या अधिक से अधिक प्रदूषण बढ़ने के कारण यह प्रक्रिया तेज हो जाती है । तेज होने के मतलब यह नहीं कि अच्छा होता है । कहते हैं ना कि जैसा विज बोते हैं वैसा ही पौधा निकलता है । उसी तरह धरती पर गलत प्रभाव के कारण वर्षा भी प्रभावित होती है । प्रदूषित दूषित गंदा वर्षा होती है ।

और यह जान ले कि आकाश से आने वाली बारिश की पहली बूंदे बहुत ही विनाशक और दुषित होती है । क्योंकि हमारे वातावरण में जो प्रदूषित हवा और  गैस होती है । बारिश की पहले बंद इसी से होकर आती है । इसलिए बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि बारिश की पहली बुंदे में नहाना बहुत खराब होता है ।

इसलिए कहते हैं बढ़ते जमाना  की तरह अगर हम अपने पर्यावरण को नहीं बचाये तो हमारी करतूत ही हमारी जान ले लेगी ।

इसलिए हम एक जिम्मेवार नागरिक की तरह प्रदूषित नहीं करेंगे वातावरण को और वातावरण को हरा भरा रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे  लगाएंगे ।


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