संभोग करना जरूरी क्यों हो जाता है ?


जैसा कि हम लोग जानते हैं कि संभोग एक प्रकार का जैविक क्रिया है । संभोग एक प्रकार का सुख भी होता है , बहुत बड़ी बीमारी भी होती है । संभोग उत्तेजना का दूसरा नाम है ।

                              हम लोग अपने समाज में इस तरह की बातें नहीं करते हैं । क्योंकि लोग इसे खुली बातें करना बहुत बुरी आदत समझते हैं । लेकिन हमारे इर्द-गिर्द कई प्राणियां हैं जो अपने जीवन के सुख में कहीं भी संभोग करना शुरु कर देते हैं ।

                                                   इससे या स्पष्ट होता है कि । धरती पर जितने भी प्राणी हैं सबको संभोग का आनंद दुनिया का सबसे अच्छा आनंद लगता है । संभोग एक प्रकार का खिंचाव भी है । संभोग में जो लो जितना लीन हो उसको उतना ही अच्छा लगता है ।

                                            प्राचीन काल से यौन क्रिया अपनी भूमिका गढ़ी है । इसका चित्रण एवं कलात्मक लोगों को बहुत आकर्षित करती है । पहले के राजा महाराजा संभोग को बहुत मानता देते थे । वह अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कई कहानियां बिखेरे हैं ।

आश्चर्य की बात यह है कि । भारतीय ऋषि वत्यासान ने तो तीसरी सदी ईसा  पूर्व ही कामसूत्र ग्रंथ लिख डाला । इसमें पुरुष को ना केवल बल्कि महिलाओं को यौन सुख को भी समान रुप से महत्वपूर्ण माना है ।


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