ध्रितराष्ट्र और गांधारी की शादी कैसे हुई, शादी में क्या समस्याएं आई।

ध्रितराष्ट्र और गांधारी की शादी कैसे हुई, शादी में क्या समस्याएं आई।dhritarashtr aur gandhari ki shadi kaise huye. Shadi mein kya samasyaye aai.

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ध्रितराष्ट्र गांधारी का पति और हस्तिनापुर का राजा

ध्रितराष्ट्र हस्तिनापुर के राजा शांतनु के पोता है और विचित्रवीर्य एवं अम्बिका के पुत्र है, लेकिन विचित्रवीर्य द्वारा ध्रितराष्ट्र का जन्म नही हुआ। ध्रितराष्ट्र का जन्म सत्यवती के पुत्र महर्षि वेद व्यास के वासना दृष्टि से हुआ, क्योंकि विचित्रवीर्य बिना पैदा किये ही मृत्यु को गए। 

ध्रितराष्ट्र के अंधे होने के कारण उसकी माँ अम्बिका है, जब महर्षि वेद व्यास के सामने गई तो वो डर से अपने आंखे बंद की हुई थी, उसी समय उसका गर्भ भरा जिसके कारण ध्रितराष्ट्र अंधा पैदा हुआ।

ध्रितराष्ट्र का विकास और पालन-पोषण और ज्ञान विद्या सब कुछ भीष्म पितामह द्वारा ही हुई, ध्रितराष्ट्र अंधा होते हुए भी बहुत ताकतवर थे और अपना निशाना कभी नही चूकते थे।

जब बात आई कि हस्तिनापुर के राजा कौन बनेंगे तो सब लोग सोच में पर गए कि अंधा आदमी कैसे राजा बन सकता है। फिर भी सब लोग न चाहते हुए भी खान्दान के बड़े बेटे को लेकर ध्रितराष्ट्र को राजा बनाने का फैसला किया। लेकिन उसके लिए जरूरी था कि ध्रितराष्ट्र की शादी हो।
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सत्यवती हस्तिनापुर की महारानी और राजा शांतनु की पत्नी

इस पर सत्यवती ने भीष्म से कहा कि गंधार नरेश सुबल की पुत्री गांधारी से विवाह के लिए बात करो, तब भीष्म ने अपने बहुत से सेना और संबंध जोड़ने की वस्तु को लेकर गंधार देश के लिए चल पड़े। जब गंधार देश के सिपाही ने इतने बड़े फौज को देखा तो डर गए और सारी फौज इसी तरफ आ रहे थे। इस बात की सूचना गांधार नरेश सुबल को दिया तो सब देखकर डर गए, लेकिन कुछ ही देर में भीष्म ने दोस्ती का पताका फहराया और मित्रता का संदेश दिया। इस पर गंधार नरेश थोड़ा सोचे इतने बड़े राजा हमसे दोस्ती क्यों करेंगे।

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गंगा पुत्र भीष्म पूरे महाभारत में कार्यवाहक

इतने में भीष्म ने गंधार नरेश के महल में जाकर शादी की प्रस्तावना रखे और कहा कि हमारा ध्रितराष्ट्र सब कुछ में निपुण है और सभी बातें, लेकिन सुबल राजा ध्रितराष्ट्र के अंधेपन को लेकर पीछे हट रहे थे, लेकिन भीष्म ने उनसे इतने बातें की  सुबल राजा को इसके लिए मनना पड़ा। लेकिन ये सारी बातें गांधारी को नही मालूम था।

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गांधारी का भाई शकुनि और गंधार राज्य का युवराज

जब ये बात सुबल राजा के पुत्र और गांधारी के भाई सकुनी को मालूम हुआ तो वो बहुत गुस्सा हुआ लेकिन सकुनी अपने पिता के आगे कुछ नही कर पाए और ये बात जब गांधारी को मालूम चला तो गांधारी भी कुछ नही कर सकी और शादी के लिए तैयार हो गई। लेकिन इधर सकुनी ने ठान लिया था कि अगर ये शादी हुई तो में हस्तिनापुर को बर्बाद कर दूंगा।

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गांधारी ध्रितराष्ट्र की पत्नी और सारी जिंदगी अंधा बनने का कारण

और शादी किसी भी तरह सही मुहूरत  पर हुई। कुछ लोग खुश थे तो कुछ लोग नाराज थे। लेकिन गांधारी ने उसी वक्त अपने आंखों पर पट्टी बांधी जो सारी जिंदगी बांधी रखी। इसका भी कारण है कि गांधारी ने सोचा कि मेरे पति अगर अपने आंखों से नही देख सकते तो में भी उसी के तरह ये दुःख भुगतुंगी और सारी जिंदगी अंधे बनी रहूंगी।

लेकिन शादी के बाद सभी लोगो का निर्णय बदला और हस्तिनापुर के राजा पांडु को बनाया गया।

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