माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua

माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua.


माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua
माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua

पांडु और कुंती के विवाह के कुछ दिन बाद ही मद्र नरेश ने हस्तिनापुर को युद्ध का न्योता दिया। उस समय हस्तिनापुर के राजा पांडु थे। और युद्ध के लिए सभी के आदेश से पांडु महराज को ही युद्ध के लिए भेजा गया।

माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua
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जब महराज ने युद्ध के लिए युद्ध स्थल पर गए तो, मद्र नरेश और पांडु दोनों युद्ध के लिए तैयार हो गए, युद्ध होने वाली ही थी। मद्र नरेश की ओर से मित्रता का संदेश आया। महराज पांडु ने मित्रता के लिए मान गए। दोनों ने गले लगकर मित्रता की। इसके बाद मद्र नरेश ने पांडु से एक वादा करवाया की में आपको जो भेंट दूंगा उसे आपको मना नही करना पड़ेगा। इसपर महराज पांडु ने मान गए। 

माद्री और पांडु का विवाह कैसे हुआ। madri aur pandu ka vivah kaise hua
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तब मद्र नरेश ने अपनी बहन माद्री को पांडु महाराज को भेंट दी। इसपर महराज ने विवशता वश माद्री को लेकर हस्तिनापुर चल दिये। लेकिन महराज पांडु ने माद्री और मद्र नरेश से कहा कि मुझे और हस्तिनापुर को माद्री स्वीकार है। लेकिन कुंती का पता नही, अगर कुंती स्वीकार कर ली तो ठीक है, नही तो में इसमें कुछ नही कर पाऊंगा। 

इसपर माद्री ने कहा कि मद्र नरेश मेरे भैया ने मेरा कन्यादान कर दिया है, आगे जो होगा वो मेरी किस्मत से होगा। में इसके लिए तैयार हूं।

हस्तिनापुर पहुंचने के बाद कुंती ने माद्री का स्नेह पूर्वक स्वागत किया। और इस तरह से माद्री और पांडु का विवाह हो गया। माद्री पांडु की दूसरी बीबी थी।
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