महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म कैसे हुआ। कर्ण के जन्म के बाद कि कहानी।

महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म कैसे हुआ। कर्ण के जन्म के बाद कि कहानी।

महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म कैसे हुआ। कर्ण के जन्म के बाद कि कहानी। mahabharat ke daanveer karn ka janm kaise hua. Karn ke janm ke baad ki kahani.
महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म कैसे हुआ। कर्ण के जन्म के बाद कि कहानी। mahabharat ke daanveer karn ka janm kaise hua. Karn ke janm ke baad ki kahani.

दानवीर कर्ण का जन्म भगवान सूर्य देव के अंश से हुआ है। दानवीर कर्ण को सूर्य पुत्र भी कहा जाता है। दानवीर कर्ण का जन्म कुंती के आंचल में हुआ है। दानवीर कर्ण का जन्म कुंती के कुवारी अवस्था में हुआ था। इसके पीछे एक कहानी है आगे जानिए।

महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म कैसे हुआ। कर्ण के जन्म के बाद कि कहानी। mahabharat ke daanveer karn ka janm kaise hua. Karn ke janm ke baad ki kahani.
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एक बार दुर्वाशा ऋषि कुंती भोज आये थे। कुंती कुंती भोज के राजा की पुत्री थी। कुंती ने दुर्वाशा ऋषि की खूब सेवा की। जब ऋषि दुर्वाशा जाने लगे तो कुंती के काम और सेवा से खुश होकर कुंती को एक वरदान दिए और कुंती से बोले में तुम्हे एक वरदान देता हूँ, तुम मेरे इस मंत्र का स्मरण करके तुम जिस किसी भी देवता को बुलायोगी उसी देवता के अंश से तुम्हे पुत्र की प्राप्ति होगी। इतना कहकर दुर्वाशा ऋषि चले गए।

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एक दिन कुंती ने स्नान करने के वक्त दुर्वाशा ऋषि के मंत्र को जांचने के लिए भगवान सूर्य देव के नाम लेकर मंत्र का स्मरण किया। मंत्र का स्मरण करते ही सूर्य देव प्रकट हुए और कुंती को अपने अंश के सामान एक तेजस्वी पुत्र को दिया। और कहा कि तुम दुर्वाशा ऋषि के मंत्र स्मरण करके मुझे बुलाई हो इसलिए तुम्हे इस पुत्र को रखना होगा। और ये पुत्र पूरे दुनिया में कर्ण के नाम से प्रसिद्ध होगा। इतना कहकर सूर्य देव चले गए।

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कुंती ने लोक निंदा और समाज के डर कर्ण का अपना नही सकी और कर्ण को एक संदूक में बंद करके गंगा नदी में बहा दी। 

और वो संदूक गंगा नदी के सहारे चम्पानगरी में आ पहुची और वो संदूक अधिरथ नामक एक सारथी के हाथ लगा। संदूक हाथ लगने के बाद अधिरथ ने बच्चे को लेकर घर चले गए। अधिरथ की पत्नी राधा को कोई संतान नही थी। इसलिए अधिरथ और राधा ने कर्ण को बड़े प्यार से पाला पोषा और अच्छा विकाश किया।
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