पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?

पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?


पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?
पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?

महराज पांडु को पांच पुत्र थे, युधिष्टिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव। पांडु महराज अपने पांचो पुत्रो से बहुत स्नेह रखते थे। पांडु महराज ने स्वम अपने पुत्रों की परवरिस की, और ज्ञान विद्या दिए। पांडु महराज के पांचों पुत्र बहुत ही गुणवान और ताकतवर थे। 

पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?
पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?

एक दिन कुंती ने पांचो पांडवो को कही घुमाने ले गई थी। इधर माद्री पांडु महराज से सेवा में लगी थी। मौशम बहुत ही सुहाना था, और वसंत ऋतू का मौशम चल रहा था।

पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?
पांडु महराज की मृत्यु कैसे हुई? Pandu mahraj ki mritu kaise huye?

पांडु महराज के अंदर बहुत जोड़ो से वासना जगी, और पांडु महराज संभोग करने के लिए आतुर हो गए। माद्री के लाख मना करने पर भी पांडु नही माने और काम में लग गए। और काम वासना के दौरान ही पांडु की मृत्यु हो गई। पांडु की मृत्यु श्राप के कारण हुई। 

एक बार पांडु ने ऋषि जोड़े को हिरण के रूप में शिकार किया था। उस वक्त हिरण जोड़े काम वासना में थे। हिरण जोड़े ने ऋषि रूप में आकर पांडु को श्राप दिया कि तुम कभी भी अच्छे राजा नही बन सकते और तुम जब भी किसी स्त्री से काम वासना के संबंध बनाओगे उसी वक्त तेरी मृत्यु हो जाएगी। इस कारण से पांडु महराज की मृत्यु हो जाती है। और माद्री पांडु को मृत देखकर वही पर सती हो जाती है। 

जब कुंती आई तो ये सब देखकर कुंती को बहुत दुःख हुआ। कुंती ने हस्तिनापुर संवाद भेजवाकर पांडु का श्राद्ध कर्म किया। और अपने पांचो पुत्रो को लेकर हस्तिनापुर चली गई।
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