भिष्म पितामह ने मृत्यु के दौरान युधिष्टिर को कैसी शिक्षा दी?

भिष्म पितामह ने मृत्यु के दौरान युधिष्टिर को कैसी शिक्षा दी? Bhishm pitamah ne mrityu ke dauran yudhishthir ko kaisi shiksha di?

भिष्म पितामह ने मृत्यु के दौरान युधिष्टिर को कैसी शिक्षा दी? Bhishm pitamah ne mrityu ke dauran yudhishthir ko kaisi shiksha di?

भिष्म पितामह ने युधिष्ठिर के बहुत से प्रश्नों का उत्तर भी दिए। और कहा - जो गृहस्थ पुरुष अतिथि का सत्कार नहीं करता, वह अतिथि अपना पाप गृहस्थ को देकर उसका पुण्य लेकर चला जाता है। तुम भी अतिथि सत्कार से पीछे मत हटना। उधोग पुरुष को धन, मित्र, ऐश्वर्य और लक्ष्मी सभी प्राप्त होता है। प्रारब्ध के भरोसे बैठे रहने से कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। 
भिष्म पितामह ने मृत्यु के दौरान युधिष्टिर को कैसी शिक्षा दी? Bhishm pitamah ne mrityu ke dauran yudhishthir ko kaisi shiksha di?

इसी प्रकार भिष्म ने और भी बहुत सी बातें बताई। और कहा - क्षात्र धर्म का पालन करते हुए पितृगण तथा देवगणों को प्रसन्न रखते हुए अपने प्रजा का पालन करो। तुम्हारे मन का सभी संताप दूर हो जाएगा। सूर्य के उत्तरायण होने पर पुनः मेरे पास आना।
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पचास दिन बाद सूर्य के उत्तरण होने पर माघ शुक्ल अष्टमी के दिन युधिष्ठिर अपने बंधु एवं श्री कृष्ण के साथ भिष्म के अग्नि संस्कार के संपूर्ण सामग्री लेकर कुरुक्षेत्र पहुंचे। सभी पहुंचकर भिष्म के चरण स्पर्श किए। भिष्म ने -  श्री कृष्ण से कहा अब मुझे जाने की आज्ञा दें। श्री कृष्ण ने तथास्तु कह दिया। भिष्म ने श्री कृष्ण को प्रणाम कर अपना प्राण त्याग दिए। युधिष्टिर ने परिवार सहित विधि पूर्वक उनका श्राद्ध कर्म किया।
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