हस्तिनापुर वरिष्ठ ध्रितराष्ट्र, विदुर, गान्धारी और कुंति की मृत्यु कैसे हुई?

हस्तिनापुर वरिष्ठ ध्रितराष्ट्र, विदुर, गान्धारी और कुंति की मृत्यु कैसे हुई? Hastinapur varishth dhritarashhtr, vidur, gandhari aur kunti ki mrityu kaise huye?

हस्तिनापुर वरिष्ठ ध्रितराष्ट्र, विदुर, गान्धारी और कुंति की मृत्यु कैसे हुई? Hastinapur varishth dhritarashhtr, vidur, gandhari aur kunti ki mrityu kaise huye?

पांडवों ने पंद्रह वर्षों तक धृतराष्ट्र व गान्धारी की सेवा की। एक दिन धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा - अब हम लोग वनवास जीवन व्यतीत करना चाहते हैं।  व्यास जी के समझाने पर युधिष्ठिर ने आजा दे दी।  धृतराष्ट्र, गंधारी, संजय, विदुर जी एवं पांडवों की माता कुंती भी वन में चली गई। वन में ही विदुर जी अपने प्राण का त्याग कर दिए। संजय हिमालय की ओर चले गए।
हस्तिनापुर वरिष्ठ ध्रितराष्ट्र, विदुर, गान्धारी और कुंति की मृत्यु कैसे हुई? Hastinapur varishth dhritarashhtr, vidur, gandhari aur kunti ki mrityu kaise huye?

एक बार धृतराष्ट्र, गंधारी, कुंती घने वन में घूम रहे थे। तभी उस वन में चारों ओर से अग्नि भड़क उठी। वे तिनके उससे बाहर ना सके। उसी में जल गए।  पांडवों को जब ज्ञात हुआ। तो बहुत दुखी हुए। फिर उन सभी का श्राद कर्म पूर्ण किया।

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