महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य पुत्र अस्वाथामा की क्या भूमिका थी?

महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य पुत्र अस्वाथामा की क्या भूमिका थी? Mahabharat yudh mein dronachary putr aswathama ki kya bhumika thhi?

महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य पुत्र अस्वाथामा की क्या भूमिका थी? Mahabharat yudh mein dronachary putr aswathama ki kya bhumika thhi?

दुर्योधन की दर्दनाक मृत्यु देख अश्वत्थामा पांडवों पर बहुत क्रोधित हुआ।  उसमें कृपाचार्य और कृतवर्मा से कहा - आज रात्रि को मैं पांडव को समूल नाश कर डालूंगा। ऐसा कह वह रात्रि का इंतजार करने लगा। अर्ध रात्रि होते ही वह पांडवों के शिविर की तरफ चला गया। उसके साथ कृतवर्मा और कृपाचार्य भी गए। 
महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य पुत्र अस्वाथामा की क्या भूमिका थी? Mahabharat yudh mein dronachary putr aswathama ki kya bhumika thhi?

अश्वत्थामा धृतधुमं के शिविर में घुस उसे पशु की तरह चीड़ कर मार डाला। उसके बाद द्रौपदी के पांचों पुत्र के शिविर में घुस उसे भी मार डाला। शिविर से बाहर जो भागते उसे कृपाचार्य, कृतवर्मा अपने तलवारों से मार डालते। अस्थमा ने शिखंडी को भी मार डाला। इस तरह कितने पांडव पक्ष का  संहार कर सुबह होते ही वहां से कृपाचार्य, कृतवर्मा सहित भाग खड़े हुए।
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सुबह होते ही जब पांडवों को यह सब ज्ञात हुआ, तो वे आश्चर्य चकित रह गए। यह देख युधिष्ठिर, श्री कृष्ण सहित भीमसेन, अर्जुन को लेकर अश्वत्थामा की खोज करने निकले। जब अश्वथामा ने पांडवों को अपने ओर आते देखा तो उसने मंत्र पढ़कर यह संसार पांडवों से रहित हो जाए कहकर ब्रम्हास्त्र को छोड़ दिया। ऋषियों के अनुरोध पर उसने कहा छोड़ना जानता हूं वापस करना नहीं। अतः मैं पांडवों को छोड़ उतरा के गर्भ की तरफ मोड़ देता हूं। उतरा उस समय गर्भवती थी। 
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इसलिए श्री कृष्ण ने उतरा के गर्भ की रक्षा की। फिर अर्जुन ने श्री कृष्ण के कहने पर तलवार की नोक से  अस्वाथाम के मस्तक से मनी निकाल ली और। कहां तुम 3000 ( तीन हजार) वर्ष तक पृथ्वी पर यो ही भटकते रहोगे। तेरे शरीर से हमेशा पिव और गंध निकलती रहेगी।  और अश्वत्थामा को वहां से बहुत दूर खदेड़ दिया।

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