महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

महाभारत युद्ध में कौरवो की हार देखकर दुर्योधन वहां से भाग गया। अस्वाथाम, कृपाचार्य को संजय द्वारा दुर्योधन के छिपने की खबर मालूम हुई तो वे तलाब के पास जाकर जोर से पुकारे - है दुर्योधन तुम बाहर निकलो और चलकर पांडवों से संघर्ष करो। हम लोग तुम्हारी रक्षा करेंगे। दुर्योधन बोला मैं घाव से पीड़ितों हूँ। कल युध्द करेंगे। पांडव लोग भी दुर्योधन का पता कर रहे थे। क्योंकि दुर्योधन के रहते पांडव विजयी नहीं हो सकते थे। 
महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

एक शिकारी द्वारा पांडवों को दुर्योधन की छिपने का स्थान मालूम हुआ। तुरंत युधिष्ठिर, भीम आदि सेना लेकर वहां पहुंचे। अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कृतवर्मा ने पांडवों को आते देख दुर्योधन को सावधान कर स्वयं पेड़ो पर जाकर छुपा गया। युधिष्ठिर तलाब के किनारे खरा होकर दुर्योधन को बोले - हे दुर्योधन - है दुर्योधन ! तुम अपनी सभी भाइयों और क्षत्रियों को मरवाकर कायर की तरह यहां छिपे हो। धिक्कार है तुम्हें। तुम बाहर निकलो और वीरों की तरह  लड़कर मरो या मारो।
महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

दुर्योधन बोला - हे धर्मराज मैं प्राण मोह से यहां नहीं छिपा हूं। मैं घायल हूं और सिर्फ एक गद्दा मेरे पास है। मैं एक-एक से गदा युद्ध कर सकता हूं।  युधिष्ठिर के आश्वासन पर दुर्योधन गद्दा लिए तलाब से बाहर निकला।  सर्वप्रथम भीम हि दुर्योधन से लड़ने आए। दोनो में भयंकर गदा युद्ध छिड़ गया। 
महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु कैसे हुई? Mahabharat yudh mein duryodhan ki mrityu kaise huye?

भीम ने अपनी प्रतिज्ञानुसार दुर्योधन की जांघ को अपनी गद्दा से तोड़ डाली। दुर्योधन धारासाई हो भूमि पर गिर पड़ा। दुर्योधन को छोड़ सभी पांडव कृष्ण सहित चले गए।

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