महराज विराट के साला कीचक की मृत्यु कैसे हुई?

महराज विराट के साला कीचक की मृत्यु कैसे हुई? Mahraj virat ke sala kichak ki mrityu kaise huye?

महराज विराट के साला कीचक की मृत्यु कैसे हुई? Mahraj virat ke sala kichak ki mrityu kaise huye?
महराज विराट के साला कीचक की मृत्यु कैसे हुई? Mahraj virat ke sala kichak ki mrityu kaise huye?

महराज विराट के साले का नाम कीचक था। वह भीम की तरह ही बली था। एक बार अपनी बहन के साथ  वह महल के अंदर गया और उसकी नजर सैरंध्री ( द्रौपदी ) पर पड़ी तो वह देखते ही काम पीड़ित हो गया। वह अकेले में द्रोपदी से मिला और बोला तुम्हारा यह अपूर्व सौंदर्य दासी बनने के योग्य नहीं है। तुम मुझे स्वीकार कर मेरे महलों की रानी बनो। द्रौपदी बोली पापी नीच मैं पराई स्त्री हूँ। तुमको शायद मालूम नहीं पांच पहलवान गंधर्व मेरे पति है। यदि उन्हें पता चला तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।
महराज विराट के साला कीचक की मृत्यु कैसे हुई? Mahraj virat ke sala kichak ki mrityu kaise huye?
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कीचक बोला मेरे जैसा पहलवान इस पृथ्वी पर नहीं है। तेरे गंधर्व पति को तो एक क्षण में मार डालूंगा। इतना कह वह द्रौपदी को पकड़ने के लिए आगे बढ़ा। द्रौपदी भागती हुई राज्य सभा में पहुंच गई और महराज से याचना करने लगी। तभी कीचक द्रौपदी के बालों को खींचते हुए धक्का दे दिया। धर्मराज युधिष्ठिर ये सब देखते हुए भी मौन रहे। सभी सभासद कीचक को धिक्कारने लगे। फिर द्रौपदी को समझा बुझाकर महल के अंदर भेज दिया।
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रात को द्रौपदी चुपके से भीम से मिली और रो रो कर कीचक से बचाने की प्रार्थना करने लगी। थीम ने कहा तुम चिंता मत करो। कल तुम कीचक से रात के समय नृत्यशाला में मिलने को बुलाना। क्योंकि वहां सुनसान रहता है। कल उसे अवश्य यमलोक भेज दूंगा। द्रौपदी चली गई।
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दूसरे दिन कीचक फिर से सैरंध्री से मिला। सैरंध्री उसे रात में नृत्यशाला में मिलने के लिए इशारा कर दी। कीचक प्रसन्न हो उठा और रात को नृत्यसाला में सैरंध्री से मिलने पहुंच गया। पलंग पर भीम लेटे थे। कीचक जाते ही भीम की कमर पकड़ बोला हे प्रिय मेरा सर्वस्य सब तुम पर निछावर है। भीम तुरंत खरे हुए और बोले पापी दुष्ट अब तू सैरंध्री नही बल्कि अपनी मृत्यु से भेंट कर। इतना का कीचक को कई बार पृथ्वी पर पटक लात घुसो से उसे मार डाला। फिर चुपचाप रसोईघर चले गए।
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