पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया?

पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?

पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?
पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?

द्रोणाचार्य जब अपने गुरु परशुराम के यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इनके साथ पांचाल नरेश के राजकुमार द्रुपद भी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। द्रोणाचार्य और द्रुपद दोनों आपस में मित्र भाव रखते थे। एक दिन द्रुपद ने द्रोणाचार्य से कहा था। मित्र, जब में पांचाल देश का राजा बन जाऊंगा तब अपना आधा राज्य तुम्हे दे दूंगा।

पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?
पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?

 उसी शर्तानुसार जब द्रोणाचार्य आर्थिक संकट में थे और द्रुपद पांचाल का राजा बना हुआ था, तब द्रोणाचार्य द्रुपद के पास जाकर पुरानी शर्त की याद दिलाई थी। परंतु द्रुपद ने द्रोणाचार्य को पहचानने से भी इंकार कर दिया। कहा- मैं राजा हु और आप एक साधारण व्यक्ति। आपसे हमारी मित्रता कैसे हो सकती है। अपमान का घूंट पीकर द्रोणाचार्य लौट आये और कृपाचार्य के पास रहने लगे।

पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?
पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?

इधर सभी कुरु राजकुमार जब अस्त्र शस्त्र सभी विध्याओं में निपुण हो गए तब सबकी परीक्षा लेकर सभी राजकुमारों को इकट्ठा किये, और बोले - अब तुम शिक्षित हो गए हो। गुरु दक्षिणा में तुम लोग पांचाल के राजा द्रुपद को युद्ध में परास्त कर बंदी बना मेरे पास ले आओ।

पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?
पांचाल नरेश द्रुपद से द्रोणाचार्य ने क्यों युद्ध किया? Panchal naresh drupad se dronacharya ne kyon yudh kiya?

दुर्योधन सहित सभी राजकुमार पांचाल के राजा द्रुपद के नगर पर हमला बोल दिए। द्रुपद ने भी अपनी सेना के साथ बहादुरी से सामना किया। परंतु अर्जुन ने द्रुपद की एक न चलने दी और उसे बंदी बना लिया। पांडवो ने द्रुपद को लाकर द्रोणाचार्य के कदमो में डाल दिया।
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