कर्ण अंग देश का राजा कैसे बना? Karna ang desh ka raja kaise bana?

कर्ण अंग देश का राजा कैसे बना? Karna ang desh ka raja kaise bana?

कर्ण अंग देश का राजा कैसे बना? Karna ang desh ka raja kaise bana?
कर्ण अंग देश का राजा कैसे बना? Karna ang desh ka raja kaise bana?

एक बार द्रोणाचार्य ने सभी महापुरुषों के सामने धनु विद्या में निपुण सभी राजकुमार का करिश्मा दिखाने का आयोजन किया । धृतराष्ट्र की आज्ञा से विदुर जी ने एक बहुत बड़ा रंग मंडप तैयार करवाएं । जिसमें सभी के बैठने की जगह थी। ठीक समय पर गुरु की आज्ञा से कौरव और पांडव ने अपने अपने कौशल दिखाएं । 

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इसमें अर्जुन ने बहुत से आश्चर्यजनक करिश्मे दिखाएं । कर्ण भी उस सभा में उपस्थित था। अर्जुन की कार्य कुशलता देख देख कर्ण भी उठकर मैदान में आ गया। दुर्योधन अर्जुन की कार्य कुशलता देख और ही जल उठा। दुर्योधन ने ही कर्ण को उकसा कर द्वन्द युद्ध के लिए मैदान में भेज दिया । कर्ण मैदान में आकर जो जो खेल अर्जुन दिखाया था वह सभी खेल दिखा दिया । फिर अर्जुन से बोला - अर्जुन मुझे तुमसे ज्यादा ही धनुर विद्या का ज्ञान है। यदि तुम द्वन्द युद्ध करना चाहते हो तो उसके लिए भी तैयार हूँ।

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कृपाचार्य ने उठकर कर्ण से कहा - है अज्ञात वीर तुम अर्जुन से युद्ध करने से पहले अपना परिचय दो।  तुम कहां के राजकुमार हो किसके पुत्र हो? 

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कर्ण अपना परिचय ना देते हुए बहुत शर्मिंदा हुआ, फिर पता चला कि कर्ण अधिरथ नामक सारथी का पुत्र है। तब कृपाचार्य ने कहा, राजवंश के राजपूतों से कोई राजा या राजकुमार ही बराबरी का युध्द कर सकता है।  तुम कहां के राजा हो।

भीम ने व्यंग करते हुए कहा -  अरे ओ सारथी पुत्र। कर्ण जाओ जाओ चाबुक उठाकर रथ चलाओ।

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 दुर्योधन ने इस सब बातों को सुनकर  क्रोध में उठकर बोला - मैं अभी इसी समय कर्ण को अंग देश का राजा बनाता हूं । फिर उसी सभा में कर्ण को दुर्योधन ने राज्य अभिषेक कर दिया।  सूर्यास्त तक जय-विजय किसी की ना हुई तब युद्ध बंद करा दिया गया।
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