कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?

कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?

कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?
कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?

पांडवों के बारह वर्ष के वनवास और तेरहवें वर्ष के वन प्रस्थान करने के बाद नारद जी वहां आए और भविष्वाणी की की दुर्योधन के पाप कर्म के कारण आज से चौधहवे वर्ष के बाद सारे कौरवो का नाश हो जाएगा। फिर नाराद जी तुरंत चले गए। दुर्योधन, कर्ण और उसके अन्य साथी घबराकर द्रोणाचार्य के पास गए और गिर-गिरआते हुए बोले गुरुदेव हम लोग आपकी शरण आए हैं। आप मेरी रक्षा करें।
कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?
कौरवों की विनाश की भविष्यवाणी कैसे हुई थी? Kauravon ki vinash ki bhawishywani kaise huye thhi?

द्रोणाचार्य बोले धृतराष्ट्र के पुत्रों ने मेरी शरण ली है। इसलिए उनका साथ न छोड़ने की प्रतिज्ञा करता हूं। परंतु जो होना होगा अवश्य होगा। होकर रहेगा।
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