पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?

पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?

पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?
पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?

अर्जुन ने जब द्रौपदी को स्वम्बर से लाये तब कुंती माँ ने द्रौपदी को धोखे से पांचो भाई में बाट दिया और सभी भाई ने कुंति माँ के बातो को मान्य देते हुए पांचो ने द्रौपदी को पत्नी माना और द्रौपदी ने भी पांचों पांडवो को अपने पति मां लिए। भाई-भाई में फूट ना हो इसलिए पांडवों ने द्रौपदी के पास रहने का एक नियमित समय बना दिया। तथा कहा यदि उस नियमित समय में कहीं दूसरा भाई पहुंच जाएगा तो उसे बारह वर्ष तक ब्रहमचारी वेष में जंगल में रहना पड़ेगा। 

पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?
पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?

द्रौपदी के गर्भ से युधिष्ठिर के अंश से एक पुत्र हुआ उसका नाम प्रतिविंध्यय पड़ा। भीमसेन के जो द्रौपदी से पुत्र हुआ, उसका नाम सुतसोम रखा गया। अर्जुन के द्रौपदी द्वारा पुत्र का नाम श्रुतकर्मा। नकुल के पुत्र का नाम सतानिक तथा सहदेव के पुत्र का श्रुतसेन हुआ। पुरोहित धौभ्यने सबका संस्कार विधि पूर्वक किया

पांडवो ने द्रौपदी के संग कैसे जीवन बिताया? Pandavo ne draupadi ke.sang kaise jeevan bitaya?
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