शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?


शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?
शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

युधिष्टिर ने इन्द्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ किया। यज्ञ की समाप्ति पर अभिषेक होना था। सभी में श्रेष्ठ कौन है और  किनकी अग्र पूजा होनी चाहिए इसी का निर्णय होने लगा। अंत में श्रीकृष्ण जी अग्र पूजा के लिए चुने गए।

शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?
शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

शिशुपाल जो चेदी नरेश था। उसने श्री कृष्ण की अग्र पूजा की बात सुनते ही क्रोधित हो उठा। उसने श्री कृष्ण को बुरा-भला कहने लगा। उसने युधिष्ठिर से कहा यहां बड़े-बड़े धर्मात्मा, गुरु, पितामह के रहते यह कृष्ण कैसे श्रेष्ठ हो गया। सभी के समझाने पर भी वह नहीं माना तथा कृष्ण जी को तरह तरह से गालियां देने लगा। लेकिन श्री कृष्ण जी शांत मुद्रा में बैठे रहें और सुनते रहे। और उसके अपराधों को गिनते रहे। पूरी सभा के व्यक्ति आश्चर्य चकित हो श्री कृष्ण की ओर देख रहे थे, कि इतनी अपमानजनक गालियां सुनने के बाद भी वे चुपचाप क्यों है।

शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?
शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

आखिर जब शिशुपाल कि एक सौ गालियां पूरी हुई तो श्री कृष्ण अपने आसन छोर उठे और सभी उपस्थित गन से बोले शिशुपाल स्वयं मुझे गालियां नहीं दे रहा है। बल्कि इसकी मृत्यु मेरे हाथों लिखी है, वही इससे कहलवा रही है। जब इसने जन्म लिया था उस समय इसकी तीन आंखें तथा चार भुजा थी और जन्म लेते वक्त इसने गधे के स्वर में चिल्लाना शुरु किया था। सब लोग घबरा गए थे। तभी आकाशवाणी हुई कि तुम्हारा पुत्र बहुत भाग्यशाली है। जिसके मिलने से इसका एक आंख तथा दो भुजा गिर जाए उसके हाथ से ही इसकी मृत्यु होगी।

शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?
शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

उसके बाद सभी राजा महाराजा इसे देखने को आने लगे। मैं भी बलराम के साथ इसे देखने पहुंचा। उसकी माता सभी देखने वालों की गोद में इसे डाल देती थी। अचानक मेरा सामना होते ही इसकी एक आंख तथा दो भुजा गिर गई। यह देख इसकी माँ ने मुझसे इसके जीवन दान देने का वचन माँगा। उसी समय मैंने इसकी माँ को 101 अपराध क्षमा कर देना वचन दिया था। और अब इसका एक सौ एक अपराध इसका पूरा हो चुका है। तभी शिशुपाल फिर श्री कृष्ण को गालियां देने लगा। श्री कृष्ण ने झट अपना चक्र शिशुपाल की ओर छोड़ दीया। शिशुपाल का सर कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा तथा उसकी ज्योति निकल श्री कृष्ण में लीन हो गई। युधिष्ठिर का यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?
शिशुपाल की मृत्यु कैसे हुई? Shishupal ki mritu kaise huye?

Previous Post
Next Post

My self dhiraj kumar I self run this website I,m owner and worker of this websites . Please keep us support

Related Posts