रामायण कथा की शुरुआत कैसे हुई? राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत का जन्म कैसे हुआ? How did the Ramayana story begin? How were Rama, Lakshmana, Shatruhan and Bharata born?

How did the Ramayana story begin? How were Rama, Lakshmana, Shatruhan and Bharata born?
रामायण कथा की शुरुआत कैसे हुई? राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत का जन्म कैसे हुआ? How did the Ramayana story begin? How were Rama, Lakshmana, Shatruhan and Bharata born?


रामायण कथा की शुरुआत कैसे हुई? राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत का जन्म कैसे हुआ?


रामायण कथा का परिचय, Introduction to Ramayan katha :-
रामायण कथा में आयोध्या के राजा 'राजा दशरथ' और उनके चारो पुत्र राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत सहित उनके सारे परिवार से जुड़ी हर घटनाओं और उनके हर एक गतिविधि एवं प्रत्येक क्षण का वर्णन है। रामायण कथा को पुस्तक में उतारने वाले व्यक्ति वाल्मीकि जी है। वाल्मीकि जी ने भगवान राम के जन्म से पहले ही पूरी रामायण कथा लिख दी थी।

रामायण कथा का शुरुआत कैसे हुई, How did the Ramayan Story begin :-
रामायण कथा का प्रारंभ आयोध्या नगरी से होती है। आयोध्या नगरी कौशल प्रदेश राज्य में थी जिसकी स्थापना राजा दशरथ के वसंज वैवस्वत मनु ने की थी। कौशल प्रदेश राज्य सरयु नदी के किनारे बसा है। आयोध्या नगरी कौशल देश की राजधानी थी। राजा दशरथ के खंदान में बहुत ही महान राजा थे उनमें से राजा दशरथ भी एक थे। राजा दशरथ बहुत ज्ञानी, विद्धवान और अच्छे राजा थे। राजा दशरथ अपने प्रजा की देख-भाल भी बेहतर तरीके से करते थे। राजा दशरथ दयालु, सत्यनिष्ठ और ईश्वरभक्त थे।
रामायण कथा का शुरुआत कैसे हुई, How did the Ramayana story begin :-

राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के जन्म कैसे हुए, How Ram, Lakshman, Shatruon and Bharat were born:-
राजा दशरथ के तीन पत्नी थी पहली पत्नी कौशल्या, दूसरी कैकयी और तीसरी पत्नी सुमित्रा थी। महाराज दशरथ के शादी के काफी दिन हो गए थे और राजा दशरथ भी वृद्धा अवस्था में जाने लगे। राजा दशरथ को एक बात सताने लगी कि मेरे बाद इस राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। राजा दशरथ को काफी चिंतन करने के बाद एक बात सूझी पुत्रयेष्टि यज्ञ करने की। यह बात राजा दशरथ अपने कुल गुरु वशिष्ठ को बताया। सूर्यवंशी कुलगुरु वशिष्ठ ने इस बात से सहमत हुए और बोले पुत्रयेष्टि यज्ञ करने से जरूर आपको पुत्र की प्राप्ति होगी। राजा दशरथ ने यह बात अपने तीनो पत्नी को बताई। पुत्रयेष्टि यज्ञ की बात सुनकर महाराज की तीनों पत्नी बहुत खुश हुई। महाराज ने यज्ञ करने की सारी व्यवस्था करने लगे। यज्ञ करने का स्थान सरयु नदी के किनारे को चुना गया। महाराज दशरथ ने सरयू नदी के तट पर सुसज्जित एवं अत्यन्त मनोरम यज्ञशाला का निर्माण करवाया तथा मन्त्रियों और सेवकों को सारी व्यवस्था करने की आज्ञा दिए। महाराज दशरथ ने देश देशान्तर के मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिये बुलावा भेज दिया। सभी व्यक्ति यज्ञ स्थल पहुंचकर यज्ञ के क्रियाकलापों को सम्पन्न किया और सभी विद्धवान और ब्राह्मणों को आदर सहित सभी प्रकार भेंट देते हुए विदा किये। राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद को अपने महल में ले जाकर अपनी तीनों पत्नी में बाँट दिया। तीनो महारानी के प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत भगवान की कृपा से तीनों रानियों ने गर्भधारण किया।
राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के जन्म कैसे हुए, How Ram, Laxman, Shatruhan and Bharata were born:-

राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के जन्म क्षण, Birth moments of Ram, Lakshman, Shatrughan and Bharata:-
जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजमान थे, कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी पत्नी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ जिसे श्री राम कहा जाने लगा इसके पश्चात् शुभ नक्षत्रों और शुभ घड़ी में महारानी कैकेयी के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ जिसे भरत कहा जाने लगा तथा तीसरी रानी सुमित्रा के गर्भ से दो तेजस्वी पुत्रों का जन्म हुआ जिसे लक्ष्मण और शत्रोहन कहा जाने लगा।

राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के नामकरण, Naming of Ram, Lakshman, Shatrughan and Bharata:-
वैसे इन सभी राजकुमारों का नामकरण जन्म के बाद में हुआ राजा दशरथ के चारों पुत्रों का नामकरण और संस्कार महर्षि वशिष्ठ के द्वारा कराया गया जो सूर्यवंशी कुलगुरु थे तथा उनके नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गये।

राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के प्रभाव, Effects of Rama, Lakshmana, shatrughan and Bharata:-
राजा दशरथ के चारो पुत्र देवता थे जो धरती पर मानव रूप में आये थे। श्री राम भगवान विष्णु के अवतार थे जो धरती पर रावण को मारने के लिए अवतार लिए थे। और अन्य पाप कर्म को खत्म करके धरती पर धर्म का ज्ञान देने के लिए आये थे। लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार थे जो क्षीरसागर में भगवान विष्णु का आसन है। और वे धरती पर श्री राम के भाई के रूप में अवतार लिए थे। और वे पूरे समय श्री राम के साथ रहे और हर दुःख और सुख में श्री राम के साथ रहे। और शत्रोहन जी सुदर्शन-चक्र और भरत जी शंख-शैल का अवतार में धरती पर आए थे। विष्णु रूप श्री राम के इर्द-गिर्द जितने भी सजीव और निर्जीव वस्तु एवं व्यक्ति थे वे सभी देवता थे और तो और श्री राम के सेवा एवं सुख के लिए कितने देवता के पुत्र ने भी धरती पर जन्म लिया। श्री राम स्वयं भगवान विष्णु के रूप थे। ये बात लोगो को मालूम नही थी लेकिन उनके कामो को देखकर सभी को यह लगता था कि ये कोई साधारण मनुष्य नही है। लेकिन कुछ विद्धवान और महागुरु को उनको देखते ही मालूम चल जाता की ये साक्षात भगवान विष्णु के रूप है। श्री राम एक आदर्शवादी और पुरुषोत्तम व्यक्ति थे। वे अपने व्यवहार से सभी लोगो को लुभा कर रखते थे। वे स्वयं भगवान विष्णु ही थे जो रावण का वध करने के लिए धरती पर अवतार हुए थे।
राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत के प्रभाव, Effects of Rama, Lakshmana, Shatruhan and Bharata:-

राम, लक्ष्मण, शत्रोहन और भरत का बचपन, Childhood of Ram, Lakshman, Shatrughan and Bharata:-
राजा दशरथ के चारो पुत्र बचपन से ही बहुत श्यामवर्ण, अत्यन्त तेजोमय, परम कान्तिवान तथा अद्‍भुत सौन्दर्यशाली थे। उन चारों शिशु को देखने वाले ठगे से रह जाते थे। उनका बचपन अत्यंत सुंदर था। उन चारों राजकुमारों का उपनयन संस्कार उनके कुलगुरु वरिष्ठ जी ने किया है और उन सभी राजकुमारों का प्राथमिक शिक्षा कुलगुरु वरिष्ठ जी ने ही दिया है। और वे सभी राजकुमार बहुत कम समय में काफी योग्य और पूर्ण हो गए।

रामायण के सभी भागों को कांड लिखकर दर्शाते हैं और ये बालकांड का भाग है। आगे में हम श्री राम एवं देवी सीता के विवाह की कथा लिखेंगे।